राईट टू रिकाल से पुलिस में भ्रष्टाचार केसे कम होगा?

राजीव दिक्सित राईट टू रिकाल वीडियो
अमेरिका की पुलिस में भारत की तुलना में भ्रष्टाचार कम क्यों है?इसका एक मात्र है – अमेरिका में नागरिक के पास बहुमति के द्धारा उनके जिला पुलिस के कमिश्नर नोकरी से निकालने की (यानिकी राइट टू रिकोल ( Right to Recall ) प्रोसीजर है. यह नोकरी से नीकालने की प्रोसीजर (राइट टू रिकोल) एकमात्र कारण है कि अमेरिका में जिला पुलिस कमिश्नर रिश्वत कम लेता है और यदि उसे पता चले कि स्टाफ में कास्टेबल या इंस्पेक्टर रिश्वत ले रहा है तो जाल बिछाकर, सबुत इकट्टाकर उन्हें अदालत में ले जाकर नोकरी से निकालवा देता है. और यहा भारत में हम नागरिको के पास जिला पुलिस कमिश्नर को नोकरी से निकलने की प्रोसिजर नही है और इसी कारण है कि कमिश्नर नीचे के अघिकारियों को हफ्ता लेने को कहता है वह आदा  रख लेता हें और आदा मिनिस्टर को भेज दें. हम अकसर कहते है कि इसका कारण है कि अमेरिका में पुलिस की तनख्वाह ज्यादा है यदि यह एकमात्र कारण होता तो लाख करोड़ कमा कर रिश्वत लेना बंद कर देते, और क्या तनख्वाह ज्यादा करने के बाद भ्रष्टाचार कम हो जायेगा? पुलिस कर्मियों का वेतन बढाना आवश्यक है, परन्तु मात्र वेतन बढाने भ्रष्टाचार नही घटेगा.

अब में सवाल पुछुगा – क्या पाठ्यपुस्तिका या अकबार के लेख लिखने वाले बुद्धिजीवी ने यह जानकारी आपको दी थी कि अमेरिका में नागरिको के पास जिला पुलिस कमिश्नर, जिला न्यायाधीश, जिला शिक्षण अधिकारी, विधायक और राइट टू रिकोल को नोकरी से निकालने कि प्रोसीजर हें या नही? क्योकि ये बूद्धिजिवी नही चाहते कि भारत के नागरिको को यह जानकारी मिले कि अमेरिका में राइट टू रिकोल ( Right to Recall ) है, और राइट टू रिकोल से अमेरिका ने भ्रष्टाचार और उनकी समस्याओं का हल किया हें. बुद्धिजीवी यह जानकारी इसलिय छिपाना चाहते है क्योकि भारत के धनिक राइट टू रिकोल के कानून नही चाहता.

अमेरिका में कुछ 2000 जिले है. करीब-करीब हर जिले में नागरिको के पास कमिश्नर को निकलने कि बहूमति आधारित प्रोसीजर है. इस प्रोसीजर में नागरिको को अदालत-कहचरी के धक्के खाने कि जरूररत नही, न ही  मुख्यमंत्री के आगे अर्जी करनी होती है या हाथ फेलाने पड़ते है. जिले के नागरिको को बहुमति साबित करना होता, और यदि जिला पुलिस कमिश्नर के खिलाफ बहुमत साबित हो जाये, तो फिर कोई अदालत या मुख्यमंत्री कोई भी उसे बचा नही सकता और उसे नोकरी से निकाल दिया जाता है एवं यह राइट टू रिकोल ( Right to Recall ) एकमात्र कारण है कि अमेरिका में जिला पुलिस कमिश्नर भ्रष्टाचार कम करता है, और इस राइट टू रिकोल की कमी एकमात्र वजह है कि भारत में अधिकतर जिला पुलिस कमिश्नर अपने और मुख्यमंत्री के कलेक्शन एजेन्ट बन गये है.

अब पुलिस के भ्रष्टाचार कि समस्या का अति सरल उपाय है – भारत तमाम ७०० जिलो में नागरिक पुलिस कमिश्नर बदल सके ऐसी प्रोसीजर बनाना. अनेक संभव प्रोसिजरो में से एक प्रोसीजर DPC-RP ( Disrict Police Chiep Replacement Drocedure ) अथार्त जिला पुलिस कमिश्नर बदलने की प्रोसीजर – मेनें अपने वेबसाइट पर रखी है. इस ड्राफ्ट पर मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर आने मात्र पर नागरिको को दूसरे दिन जिले के पुलिस कमिश्नर को बहुमति द्धारा नोकरी से निकलने प्रोसीजर मिल जायगी. और यह प्रोसीजर आने के मात्र १ महीने में पुलिस का भ्रष्टाचार नही बराबर हो जायेगा.

अब मैं  सवाल पुछुगा : क्या भारत के मुख्यमंत्री जिला पुलिस कमिश्नर बदलने की प्रोसीजर (याने राइट टू रिकोल जिला पुलिस कमिश्नर ) पर – खुशी से बिना नागरिको के आन्दोलन या दबाव से हस्ताक्षर करेंगे?

मेरा मानना है – नहीं. बिना लोक दबाव या जन-आन्दोलन के भारत का शायद ही कोई मुख्यमंत्री राइट टू रिकोल जिला पुलिस कमिश्नर की प्रोसीजर पर हस्ताक्षर देगा. क्योकि यदि बहुमति नागरिको के पास कमिश्नर को निकलने प्रोसीजर है, तो जो कमिश्नर महीने का १ करोड़ रुपये इकट्टा करता है, वह १ लाख रूपये पर आ जायेगा. और १ करोड़ रूपये में से मुक्यमंत्री, ग्रहमंत्री या विधायक को जो रु ५० लाख रूपये मिलते है, वह भी ५०,००० रूपये हजार हो जायेगा. इसीलिए यदि कोई नागरिक यदि राइट टू रिकोल कमिश्नर की बर्खास्त लेकर मुक्यमंत्री, विधायक के पास जाता है तो वे सिर्फ गोल-गोल बाते करेंगे लेकिन यदि नागरिक प्रधानमत्री या मुक्यमंत्री को आरटीआई-२ पर हस्ताक्षर करने के लिय मजबूर कर देते है, तो उसके बाद अघिकतर नागरिक राइट टू रिकोल कमिश्नर पर अपनी हाँ दर्ज करा देंगे, और जब करोडो नागरिक हाँ दर्ज कराएँगे, तो विवश होकर मुक्यमंत्री को इस प्रोसीजर के ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर करने पडेगे. याह हस्ताक्षर आने के दूसरे दिन नागरिको जो कमिसनर को निकालने की प्रोसीजर मिलेगी. और यह राइट टू रिकोल कमिश्नर की प्रोसीजर आने के मात्र २ महीनो में पुलिस में भ्रष्टाचार नही के बराबर हो जायेगा. और उसके मात्र २-३ महीनो में और २५० राइट टू रिकोल प्रोसिजरे (जेसे नागरिक प्रधानमत्री बदल सके, आरबीआई गवर्नर बदल सके, जिला शिक्षण अधिकारी बदल सके सके, जिला सरकारी वकील बदल सके )आ जायेगी, और इनसे सबसे इन विभागों में भ्रष्टाचार नही के बराबर हो जायेगा. राइट टू रिकोल के आने से नागरीको को हजारों अधिकारी बदलने की जरुरत नही पड़ेगी. अधिकतर अधिकारी समझदार है और काम करना जानते है.  इसलिए ५० प्रतिशत अधिकारी राइट टू रिकोल आने के १५ दिन में काम सुधार देंगे, और जब १-२ प्रतिशत की नोकरी जायेगी तो अन्य ४८ प्रतिशत भी काम सुधार लेंगे और भ्रष्टाचार कम कर देंगे.

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A 3 line law can reduce Poverty and Corruption in Police in 3 months !!
मात्र तीन लाइन का क़ानून गरीबी- भ्रष्टाचार कम कर सकता है!! 

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6 Comments

  1. mein aapke right to recall ke vichaar se smpurn rup se semhat hu.

  2. sushant says:

    How to join and participate in this holy war against the corrupt system.

  3. valve says:

    Join Bharat Swabhiman for a better bharat.

  4. Jatinder says:

    This is a noble and practical idea.Further this idea is time tested as we know this is working in USA. I t should be adopted in India also to get rid of inefficient and corrupt officials

  5. ALPESH GHODASARA says:

    kya adbhut bat kahi hai shree rajiv bhai ne?
    rajiv bhai jese desh bhakt ko koti kotu vandan…………..

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