राईट टू रिकाल क्या होता है
राजीव दिक्सित विडियो
देश कि जनता अगर किसी नेता से संतुष्ट नहीं हो तो उस वक्त जनता के पास नेता को निकालने का अधिकार होना चाहिए इसी को राईट टू रिकाल कहते हैं।
बिना राईट टू रिकाल देश में भष्टाचार मिटाना सम्भब नहीं है क्योंकि देश की जनता का नेता पर कोई कण्ट्रोल नहीं होता है अगर देश की जनता का कोई भी कण्ट्रोल नेता पर नहीं होगा तो तो उसका भष्ट होना आसान होगा |
जनता के पास नेता को निकालने का अधिकार होना चाहिए
अगर जनता के पास रजा को निकलने का अधिकार नहीं हो राजा प्रजा को लूट लेगा।
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A 3 line law can reduce Poverty and Corruption in Police in 3 months !!
मात्र तीन लाइन का क़ानून गरीबी- भ्रष्टाचार कम कर सकता है!!
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ham sab ko jagruk ho ke is mission ko pura karana hoga.
अब पुलिस के भ्रष्टाचार कि समस्या का अति सरल उपाय है – भारत तमाम ७०० जिलो में नागरिक पुलिस कमिश्नर बदल सके ऐसी प्रोसीजर बनाना. अनेक संभव प्रोसिजरो में से एक प्रोसीजर DPC-RP ( Disrict Police Chiep Replacement Drocedure ) अथार्त जिला पुलिस कमिश्नर बदलने की प्रोसीजर – मेनें अपने वेबसाइट पर रखी है. इस ड्राफ्ट पर मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर आने मात्र पर नागरिको को दूसरे दिन जिले के पुलिस कमिश्नर को बहुमति द्धारा नोकरी से निकलने प्रोसीजर मिल जायगी. और यह प्रोसीजर आने के मात्र १ महीने में पुलिस का भ्रष्टाचार नही बराबर हो जायेगा
ranjeet singh Beas
मेरा मानना है – नहीं. बिना लोक दबाव या जन-आन्दोलन के भारत का शायद ही कोई मुख्यमंत्री राइट टू रिकोल जिला पुलिस कमिश्नर की प्रोसीजर पर हस्ताक्षर देगा. क्योकि यदि बहुमति नागरिको के पास कमिश्नर को निकलने प्रोसीजर है, तो जो कमिश्नर महीने का १ करोड़ रुपये इकट्टा करता है, वह १ लाख रूपये पर आ जायेगा. और १ करोड़ रूपये में से मुक्यमंत्री, ग्रहमंत्री या विधायक को जो रु ५० लाख रूपये मिलते है, वह भी ५०,००० रूपये हजार हो जायेगा. इसीलिए यदि कोई नागरिक यदि राइट टू रिकोल कमिश्नर की बर्खास्त लेकर मुक्यमंत्री, विधायक के पास जाता है तो वे सिर्फ गोल-गोल बाते करेंगे लेकिन यदि नागरिक प्रधानमत्री या मुक्यमंत्री को आरटीआई-२ पर हस्ताक्षर करने के लिय मजबूर कर देते है, तो उसके बाद अघिकतर नागरिक राइट टू रिकोल कमिश्नर पर अपनी हाँ दर्ज करा देंगे, और जब करोडो नागरिक हाँ दर्ज कराएँगे, तो विवश होकर मुक्यमंत्री को इस प्रोसीजर के ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर करने पडेगे. याह हस्ताक्षर आने के दूसरे दिन नागरिको जो कमिसनर को निकालने की प्रोसीजर मिलेगी. और यह राइट टू रिकोल कमिश्नर की प्रोसीजर आने के मात्र २ महीनो में पुलिस में भ्रष्टाचार नही के बराबर हो जायेगा. और उसके मात्र २-३ महीनो में और २५० राइट टू रिकोल प्रोसिजरे (जेसे नागरिक प्रधानमत्री बदल सके, आरबीआई गवर्नर बदल सके, जिला शिक्षण अधिकारी बदल सके सके, जिला सरकारी वकील बदल सके )आ जायेगी, और इनसे सबसे इन विभागों में भ्रष्टाचार नही के बराबर हो जायेगा. राइट टू रिकोल के आने से नागरीको को हजारों अधिकारी बदलने की जरुरत नही पड़ेगी. अधिकतर अधिकारी समझदार है और काम करना जानते है. इसलिए ५० प्रतिशत अधिकारी राइट टू रिकोल आने के १५ दिन में काम सुधार देंगे, और जब १-२ प्रतिशत की नोकरी जायेगी तो अन्य ४८ प्रतिशत भी काम सुधार लेंगे और भ्रष्टाचार कम कर देंगे.
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ranjeet singh Beas
देश कि जनता अगर किसी नेता से संतुष्ट नहीं हो तो उस वक्त जनता के पास नेता को निकालने का अधिकार होना चाहिए इसी को राईट टू रिकाल कहते हैं।
बिना राईट टू रिकाल देश में भष्टाचार मिटाना सम्भब नहीं है क्योंकि देश की जनता का नेता पर कोई कण्ट्रोल नहीं होता है अगर देश की जनता का कोई भी कण्ट्रोल नेता पर नहीं होगा तो तो उसका भष्ट होना आसान होगा |
जनता के पास नेता को निकालने का अधिकार होना चाहिए
ranjeet singh Beas
guru ji charan sparsh,
right to call, bilkul sahi hai isko jaldi se jaldi lagu karna chaiye aur janta ko iske bare me jayada se jayada batana chaiye, janta me jagrukta se hi desh aage badega aur tarakki karega
Jai guru ji ki,
Raaj Kumar
your opinion is very right, and I agree with you
hame har jile main bharat swabhiman ka office khol dena chahiye our logo ko jagrut kare ke swadeshi saman hi kharide our uska laabh our hani logo ko bole saath main rajiv dixit ki cd har cd store main available kare.main sunil shukla mumbai se main apni jindgi main bhahut change aaya maine har otechonoligi ki saman kharidna band kar diya sirf swadeshi saman hi kharidta hoo